उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mere na-rasa tasawwur ne suragh pa liya hai

मिरे ना-रसा तसव्वुर ने सुराग़ पा लिया है

مرے نارسا تصور نے سراغ پا لیا ہے

शायर: Owais Ahmad Dauran7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिरे ना-रसा तसव्वुर ने सुराग़ पा लिया है
मैं पता लगा चुका हूँ तू कहाँ कहाँ छुपा है

मुझे कौन सर-बुलंदी की तरफ़ बुला रहा है
मिरा नर्गिसी तख़य्युल तो शिकस्त खा चुका है

तुझे क़ातिलों के नर्ग़े से छुड़ाएगा न कोई
ये है मक़्तल ऐ मुसाफ़िर तू किसे पुकारता है

सर-ए-शाम जो ग़रीबों के दिए बुझा रही हैं
उन्हीं साज़िशों का मरकज़ ये तिरी महल-सरा है

कोई मौसमी परिंदों से कहे इधर न आएँ
अभी मेरे गुलसिताँ की बड़ी मुज़्महिल फ़ज़ा है

सुन ऐ मेरी प्यारी दुनिया मिरी बे-क़रार दुनिया
तिरा दर्द-मंद शा'इर तिरे गीत गा रहा है

वो ब-ज़ो'म-ए-ख़ुद गुलसिताँ का है सरबराह 'दौराँ'
जो वो चाहे सो करेगा उसे कौन रोकता है