उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mere KHwabon ki palkon se sitare chhinne wale

मिरे ख़्वाबों की पलकों से सितारे छीनने वाले

مرے خوابوں کی پلکوں سے ستارے چھیننے والے

शायर: maajid aasii5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिरे ख़्वाबों की पलकों से सितारे छीनने वाले
न हो तू बे-सहारा सब सहारे छीनने वाले

मैं दरिया-ए-मोहब्बत हूँ मिरी मंज़िल नहीं कोई
बिखरता देख ले मुझ को किनारे छीनने वाले

वो बच्चे फिर तो बारूदी खिलौनों से ही खेलेंगे
ये कब समझेंगे बच्चों से ग़ुबारे छीनने वाले

बताया शाह ने उन को पिलाना दूध बदले में
पनह माँगें अगर बच्चे तुम्हारे छीनने वाले

मुकाफ़ात-ए-'अमल देखो उन्हों ने ख़्वाब छीने थे
हक़ीक़त मैं ने पा ली और वो हारे छीनने वाले