उर्दू शायरी · ग़ज़ल

meri baaton se teri aankh ke bhar jaane se

मेरी बातों से तिरी आँख के भर जाने से

میری باتوں سے تری آنکھ کے بھر جانے سے

शायर: maajid aasii5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मेरी बातों से तिरी आँख के भर जाने से
और लरज़ जाता हूँ मैं नींद में डर जाने से

मुझ से जलता हुआ मरक़द का दिया कहता है
'इश्क़ मरता नहीं इंसान के मर जाने से

घर की तन्हाई तिरी याद बढ़ा देती है
क्यों गुरेज़ाँ हूँ मैं और अपने ही घर जाने से

सर के झुक जाने से बेहतर है कि सर ही न रहे
ता कि तौक़ीर सलामत रहे सर जाने से

अब तो ख़ुद पर भी भरोसा न रहा 'माजिद' को
'अह्द से तेरे मिरे दोस्त मुकर जाने से