उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mere KHwabon KHayalon ko nai parwaz dete hain

मिरे ख़्वाबों ख़यालों को नई परवाज़ देते हैं

مرے خوابوں خیالوں کو نئی پرواز دیتے ہیں

शायर: Umesh Pant5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिरे ख़्वाबों ख़यालों को नई परवाज़ देते हैं
मैं चल पड़ता हूँ जब वो रास्ते आवाज़ देते हैं

'उमूमन ज़िंदगी की बे-सुरी बे-धुन कहानी को
सफ़र के वाक़'ए बे-शक सुरीला साज़ देते हैं

वो मुश्किल तंग रस्ते ले के जाते हैं खुले-पन तक
वो बर्फ़ीले शिखर जीने का जैसे राज़ देते हैं

जहाँ लगता है सब कुछ ख़त्म है इन बंद राहों पर
नया सा मोड़ देते हैं नया आग़ाज़ देते हैं

निकल जाते हैं जो सब छोड़ कर पीछे वही राही
नया इक वक़्त देते हैं नई परवाज़ देते हैं