उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ai meri jaan dil-o-jaan mein rakhna hai tujhe

ऐ मेरी जान दिल-ओ-जान में रखना है तुझे

اے میری جان دل و جان میں رکھنا ہے تجھے

शायर: Umesh Pant5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ऐ मेरी जान दिल-ओ-जान में रखना है तुझे
या'नी कि अपने ही इम्कान में रखना है तुझे

तेरे एहसास से चेहरे का बदन खुल जाए
अपनी इस आख़िरी मुस्कान में रखना है तुझे

सारी दुनिया के वबालों से बचा कर के तुझे
मैं ने तो हालत-ए-आसान में रखना है तुझे

ताकि पढ़ कर ये ज़माना कहे क्या ख़ूब कहा
मुझ को लिख कर किसी दीवान में रखना है तुझे

बस यही सोच के मैं ने ये ग़ज़ल लिख डाली
अपने हर शे'र के 'उन्वान में रखना है तुझे