उर्दू शायरी · ग़ज़ल

milan ki raat wo pahli nahin mumkin bhula pana

मिलन की रात वो पहली नहीं मुमकिन भुला पाना

ملن کی رات وہ پہلی نہیں ممکن بھلا پانا

शायर: Vijay Arun5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिलन की रात वो पहली नहीं मुमकिन भुला पाना
मिरा तेरे क़रीब आना तिरा ख़ुद में सिमट जाना

वो पहली शब में पहले तो झिजकना और शर्माना
मुझे है याद फिर ख़ुद ही तिरा मुझ से लिपट जाना

वो अक्सर याद आता है तिरा आग़ोश में आना
मुझे मदहोश कर के फिर वो चुपके से चले जाना

मोहब्बत में नहीं ख़ूबी ये जो समझा रहे हो तुम
जब अपने दिल को समझा लो मिरे दिल को भी समझाना

बहुत नज़दीक से चेहरा बख़ूबी कब दिखाई दे
जिसे घर ने न पहचाना उसे दुनिया ने पहचाना