उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jab bhi jazbaat ka tufan aae

जब भी जज़्बात का तूफ़ान आए

جب بھی جذبات کا طوفان آئے

शायर: Vijay Arun5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जब भी जज़्बात का तूफ़ान आए
मेरे अल्फ़ाज़ बहा कर ले जाए

दिल की धड़कन पे वही ख़ूब रहे
बंद होंटों ने जो नग़्मे गाए

क्या अजब है कि ख़ुशी हो कि हो ग़म
आँख का जाम छलक ही जाए

दोपहर में मिरा सूरज डूबा
ऐसे मायूसी के बादल छाए

शेर कहता है तो छपवाया भी कर
पर 'अरुण' कौन तुझे समझाए