उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mere rone par hansi achchhi nahin

मेरे रोने पर हँसी अच्छी नहीं

میرے رونے پر ہنسی اچھی نہیں

शायर: Dattatriya Kaifi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मेरे रोने पर हँसी अच्छी नहीं
बस जी बस ये दिल-लगी अच्छी नहीं

दिल लगी का भी न रोना हो कहीं
हर घड़ी की ये हँसी अच्छी नहीं

नाज़ुकी का उज़्र रहने दीजिए
बात ऐ जाँ बस यही अच्छी नहीं

आ के बैठा और जाने की पड़ी
बस यही तो ख़ू तिरी अच्छी नहीं

कौन सी 'कैफ़ी' बुरी है मुझ में बात
हाँ ये इक क़िस्मत मिरी अच्छी नहीं