उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mehnat ke baad bhi milin nafrat ki roTiyan

मेहनत के बा'द भी मिलीं नफ़रत की रोटियाँ

محنت کے بعد بھی ملیں نفرت کی روٹیاں

शायर: Kailash Sengar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मेहनत के बा'द भी मिलीं नफ़रत की रोटियाँ
सब के नसीब में कहाँ इज़्ज़त की रोटियाँ

आँखों से देखने की नहीं चीज़ माँ का प्यार
पर फिर भी दिखाती उसे औरत की रोटियाँ

जब जब हमारी भूक की ये आग जल उठी
वो सेंक गए इस पे सियासत की रोटियाँ

है स्वाद उन का ख़ूब मगर सच तो यही है
पचती नहीं सभी को ये शोहरत की रोटियाँ

बीवी से हम ने सच ये छुपाया है उम्र भर
औरत से बड़ी चीज़ है औरत की रोटियाँ