उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mausam KHushbu rang dhanak ke manzar sare uske the

मौसम ख़ुशबू रंग धनक के मंज़र सारे उस के थे

موسم خوشبو رنگ دھنک کے منظر سارے اس کے تھے

शायर: Kahkashan Tabassum6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मौसम ख़ुशबू रंग धनक के मंज़र सारे उस के थे
रात की काली छाया मेरी चाँद सितारे उस के थे

बीच समुंदर बख़्त हमारा साहिल तक ये आता कब
मौज-ए-हवा पे नाम था उस का दूर किनारे उस के थे

सहमी सहमी गूँगी बहरी एक गुजरिया मेरी थी
हँसते गाते धूल उड़ाते राज-दुलारे उस के थे

इक छोटी सी छत की ख़ातिर क्या क्या ख़्वाब गँवा बैठी
भूल गई कि ईंटें उस की मिट्टी गारे उस के थे

ज़ंजीरों के बदले अब भी गहने पाती हूँ जैसे
सदियों से ये जब्र के बंधन बीच हमारे उस के थे

कितनी अजब तक़्सीम 'तबस्सुम' करती है ये दुनिया भी
मेरा हिस्सा ज़हर-ए-हलाहल अमृत धारे उस के थे