उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mange hai ek sitara sar-e-asman phir

माँगे है इक सितारा सर-ए-आसमान फिर

مانگے ہے اک ستارہ سر آسمان پھر

शायर: Kahkashan Tabassum7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

माँगे है इक सितारा सर-ए-आसमान फिर
दिल को ये ज़िद कि सू-ए-उफ़ुक़ हो उड़ान फिर

अब ऐ क़फ़स नशीनों उठाओ दु'आ को हाथ
है शाख़-शाख़ मौसम-ए-वहम-ओ-गुमान फिर

हर लम्हा किस महाज़ की जानिब सफ़र में है
खींचे हुए रगों में लहू की कमान फिर

दरियाओं का ये चुप तो ख़तरनाक है बहुत
बाँधो बुलंद शाख़ पे लोगो मचान फिर

पहले ख़िराज माँग रहा है अमीर-ए-वक़्त
लौटाएगा वो शहर में अम्न-ओ-अमान फिर

दिल तंग हो गया तो ज़मीं भी हुइ है तंग
हम ख़्वाब के नगर में बनाएँ मकान फिर

इन हिचकियों का कुछ तो सबब होगा 'कहकशाँ'
शायद किसी को आया कहीं मेरा ध्यान फिर