उर्दू शायरी · ग़ज़ल

manzil pe dhyan humne zara bhi agar diya

मंज़िल पे ध्यान हम ने ज़रा भी अगर दिया

منزل پہ دھیان ہم نے ذرا بھی اگر دیا

शायर: Aalok Shrivastav6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मंज़िल पे ध्यान हम ने ज़रा भी अगर दिया
आकाश ने डगर को उजालों से भर दिया

रुकने की भूल हार का कारन न बन सकी
चलने की धुन ने राह को आसान कर दिया

पानी के बुलबुलों का सफ़र जानते हुए
तोहफ़े में दिल न देना था हम ने मगर दिया

पीपल की छाँव बुझ गई तालाब सड़ गए
किस ने ये मेरे गाँव पे एहसान कर दिया

घर खेत गाए बैल रक़म अब कहाँ रहे
जो कुछ था सब निकाल के फ़स्लों में भर दिया

मंडी ने लूट लीं जवाँ-फ़स्लें किसान की
क़र्ज़े ने ख़ुद-कुशी की तरफ़ ध्यान कर दिया