उर्दू शायरी · ग़ज़ल

har bar hua hai jo wahi to nahin hoga

हर बार हुआ है जो वही तो नहीं होगा

ہر بار ہوا ہے جو وہی تو نہیں ہوگا

शायर: Aalok Shrivastav7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हर बार हुआ है जो वही तो नहीं होगा
डर जिस का सताता है अभी तो नहीं होगा

दुनिया को चलो परखें नए दोस्त बनाएँ
हर शख़्स ज़माने में वही तो नहीं होगा

वो शख़्स बड़ा है तो ग़लत हो नहीं सकता
दुनिया को भरोसा ये अभी तो नहीं होगा

है उस का इशारा भी समझने की ज़रूरत
होगा तो कभी होगा अभी तो नहीं होगा

दो-चार गड़े मुर्दे उखाड़ेंगे किसी रोज़
हर बार नया झगड़ा कभी तो नहीं होगा

कुछ और भी हो सकता है तक़रीर का मतलब
जो आप ने समझा है वही तो नहीं होगा

हर बार ज़माने का सितम होगा मुझी पर
हाँ मैं ही बदल जाऊँ कभी तो नहीं होगा