उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main us maqam pe hun jis ko la-makan kahiye

मैं उस मक़ाम पे हूँ जिस को ला-मकाँ कहिए

میں اس مقام پہ ہوں جس کو لا مکاں کہئے

शायर: Qaisar Usmani5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं उस मक़ाम पे हूँ जिस को ला-मकाँ कहिए
ज़मीं न कहिए उसे और न आसमाँ कहिए

फ़ज़ा-ए-दिल न मो'अत्तर हो जिस से ऐ हमदम
न बोस्ताँ उसे कहिए न गुलसिताँ कहिए

विसाल-ए-यार मयस्सर न हो तो क्या ग़म है
ख़याल-ए-यार तो है जिस को दिल-सिताँ कहिए

रफ़ीक़ जितने थे अपने वो उठ गए सारे
है कौन बज़्म में अब जिस को राज़दाँ कहिए

चमन में रह के भी 'क़ैसर' मुझे नहीं मा'लूम
बहार कहिए उसे या उसे ख़िज़ाँ कहिए