उर्दू शायरी · ग़ज़ल

majra ulfat ka teri aur hum likkhenge kya

माजरा उल्फ़त का तेरी और हम लिक्खेंगे क्या

ماجرا الفت کا تیری اور ہم لکھیں گے کیا

शायर: Yaseen Barari6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

माजरा उल्फ़त का तेरी और हम लिक्खेंगे क्या
प्यार तुझ से हो गया है इस को फिर भूलेंगे क्या

काश तुम ये फ़ैसला कर जाते अपने प्यार का
अपनी क़िस्मत आज़मा कर बज़्म में देखेंगे क्या

आरज़ूएँ सारी बर आएँगी कैसे सोचिए
ये सवाल अपने ही क़ल्ब-ओ-जाँ से हम पूछेंगे क्या

उस का आना है यक़ीनन वो तो आएगी मगर
मौत की आँखों में आँखें डाल कर देखेंगे क्या

रिज़्क़ देने वाला तो हम को नज़र आता नहीं
जो मुक़द्दर हो चुका है उस से और पाएँगे क्या

हक़-परस्ती और सदाक़त का सबक़ हम ने दिया
दुनिया वालों से भला 'यासीन' हम सीखेंगे क्या