उर्दू शायरी · ग़ज़ल

lamhat zindagi mein kuchh aise bhi aae hain

लम्हात ज़िंदगी में कुछ ऐसे भी आए हैं

لمحات زندگی میں کچھ ایسے بھی آئے ہیں

शायर: Danish Farahi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

लम्हात ज़िंदगी में कुछ ऐसे भी आए हैं
दिल पर पड़ी है चोट तो हम मुस्कुराए हैं

यूँ हम ने गुलसिताँ से अंधेरे मिटाए हैं
बुझते हुए चराग़ लहू से जलाए हैं

कुछ ग़म नहीं जो फैली है हर-सू ग़मों की धूप
सर पर हमारे आप की ज़ुल्फ़ों के साए हैं

हूँ मुंतज़िर वो आएँ तो उन पर करूँ निसार
पलकों पे मैं ने चंद सितारे सजाए हैं

दौर-ए-ख़िज़ाँ भी दिल से फ़रामोश हो गया
अब के बरस बहार ने वो गुल खिलाए हैं

उन का मक़ाम कम नहीं लात-ओ-मनात से
लोगों ने ख़्वाहिशात के जो बुत बनाए हैं

सब के दिलों में आतिश-ए-नफ़रत है शो'ला-ज़न
'दानिश' हम आज कौन सी बस्ती में आए हैं