उर्दू शायरी · ग़ज़ल

lahu ki lahr mein ek KHwab-e-dil-shikan bhi gaya

लहू की लहर में इक ख़्वाब-ए-दिल-शिकन भी गया

لہو کی لہر میں اک خواب دل شکن بھی گیا

शायर: Faheem Shanas Kazmi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

लहू की लहर में इक ख़्वाब-ए-दिल-शिकन भी गया
फिर उस के साथ ही आँखें गईं बदन भी गया

बदलते वक़्त ने बदले मिज़ाज भी कैसे
तिरी अदा भी गई मेरा बाँकपन भी गया

बस एक बार वो आया था सैर करने को
फिर उस के साथ ही ख़ुश्बू गई चमन भी गया

बस इक तअल्लुक़ बे-नाम टूटने के ब'अद
सुख़न तमाम हुआ रिश्ता-ए-सुख़न भी गया