उर्दू शायरी · ग़ज़ल

lahu ki aanch jaisa ho raha hai

लहू की आँच जैसा हो रहा है

لہو کی آنچ جیسا ہو رہا ہے

शायर: Nabeel Ahmad Nabeel7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

लहू की आँच जैसा हो रहा है
तुम्हारा ग़म सितारा हो रहा है

ये कौन आया है बाम-ए-आरज़ू पर
फ़ज़ाओं में उजाला हो रहा है

झड़ी है धूल किस के नक़्श-ए-पा से
बहुत आसान रस्ता हो रहा है

सिकुड़ती जा रही है मुझ पे धरती
बदन मेरा कुशादा हो रहा है

मिरी पलकों पे इक मौहूम आँसू
कि शबनम से शरारा हो रहा है

समझती है यही दुनिया कि मुझ को
मोहब्बत में ख़सारा हो रहा है

असा जब से 'नबील' आया मयस्सर
समुंदर भी किनारा हो रहा है