उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kyun zulm Dha raha hun main apne wajud par

क्यूँ ज़ुल्म ढा रहा हूँ मैं अपने वजूद पर

کیوں ظلم ڈھا رہا ہوں میں اپنے وجود پر

शायर: Jahangeer Nayab6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क्यूँ ज़ुल्म ढा रहा हूँ मैं अपने वजूद पर
कीचड़ उछालता हूँ मैं अपने वजूद पर

इंकार कर के ख़ुद ही मैं अपने वजूद का
ग़ुस्सा उतारता हूँ मैं अपने वजूद पर

क्या चाहता हूँ ख़ुद से मुझे ख़ुद नहीं पता
और ता'न छोड़ता हूँ मैं अपने वजूद पर

डर है कोई चुरा न ले मुझ से कभी मुझे
पहरे लगा रहा हूँ मैं अपने वजूद पर

कर के ख़ुद अपने सारे सुबूतों को मुस्तरद
उँगली उठा रहा हूँ मैं अपने वजूद पर

'नायाब' मुझ से फ़ैज़ उठाता है हर कोई
कब दाग़-ए-बद-नुमा हूँ मैं अपने वजूद पर