उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kuchh log jo hasil hon ganwae nahin jate

कुछ लोग जो हासिल हों गँवाए नहीं जाते

کچھ لوگ جو حاصل ہوں گنوائے نہیں جاتے

शायर: M. Usman Shakir8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कुछ लोग जो हासिल हों गँवाए नहीं जाते
इस तरह ख़ज़ाने तो लुटाए नहीं जाते

अमृत तिरी बातों का ही काफ़ी है अजल को
यूँ ज़हर प्याले तो पिलाए नहीं जाते

क्यों हम से हुए जाते हो अंजान अचानक
इस तरह तो पैमान भुलाए नहीं जाते

जैसे तिरी यादों को सजाया है क़फ़स में
ऐसे तो शबिस्ताँ भी सजाए नहीं जाते

रहते हैं कसक बन के तिरी याद के जुगनू
इस दिल से तिरी याद के साए नहीं जाते

कोई उसे बतलाए कि आ जाए वगर्ना
अब हम से दिए और जलाए नहीं जाते

जिस तरह दिल-ए-सोख़्ता को मैं ने सुलाया
उस तरह तो बच्चे भी सुलाये नहीं जाते

'शाकिर' मैं वो अंदाज़-ए-जफ़ा भूल तो जाऊँ
जो नक़्श हैं दिल पर वो मिटाए नहीं जाते