उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kuchh is ada se tujhko diwana dekhta hai

कुछ इस अदा से तुझ को दीवाना देखता है

کچھ اس ادا سے تجھ کو دیوانہ دیکھتا ہے

शायर: Kaif Husain Banarasi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कुछ इस अदा से तुझ को दीवाना देखता है
रौशन दिए को जैसे परवाना देखता है

वो सामने गर आएँ देखूँगा उन को लेकिन
ऐसे कि जैसे कोई बेगाना देखता है

मैं ज़ात में हूँ शामिल उस की सो इस तरह से
वो शख़्स ख़ुद में मुझ को रोज़ाना देखता है

आँखों के सामने गर जल्वा हबीब का हो
'आशिक़ भला कहाँ फिर पैमाना देखता है

का'बा हो या कलीसा या बुत-कदा हो कोई
प्यासा हो रिंद गर तो मय-ख़ाना देखता है

इक 'उम्र साथ रह कर अब 'कैफ़' दोस्तों में
कितना है किस से अपना याराना देखता है