उर्दू शायरी · ग़ज़ल

koi na dekha ki wapas aaya KHuda ke ghar ek bar ja kar

कोई न देखा कि वापस आया ख़ुदा के घर एक बार जा कर

کوئی نہ دیکھا کہ واپس آیا خدا کے گھر ایک بار جا کر

शायर: Dattatriya Kaifi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कोई न देखा कि वापस आया ख़ुदा के घर एक बार जा कर
वो दैर-ओ-का'बा में है मुक़य्यद ख़ुदा ख़ुदा कर ख़ुदा ख़ुदा कर

समझ न तू उस को बे-नवाई ये दो-जहाँ की है बादशाई
कि दौलत-ए-इश्क़ हाथ आई मता-ए-दुनिया-ओ-दीं लुटा कर

जहाँ की काएनात क्या है उमीद-ए-उक़्बा में क्या धरा है
बरी हैं जो उस से वो न देखें इधर ज़रा आँख भी उठा कर

करम तिरा तमअ' पर है मब्नी है तेरी ख़ैरात इस नफ़स पर
कि सूद में अशरफ़ी मिलेगी जो देगा इक दाम हाथ उठा कर

ये दिल-लगी क्या है बाद-ओ-बाराँ हँसी है ये या सितम-ज़रीफ़ी
गुलों को मिट्टी में क्यूँ मिलाया खिला खिला कर हँसा हँसा कर

न रह सके पेश-ए-मेहर-ताबाँ गुल और शबनम में रब्त-ए-रस्मी
मैं कट गया कल जहाँ से 'कैफ़ी' दिल एक दिलदार से लगा कर