उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHun-e-arman se likhi apni kahani maine

ख़ून-ए-अरमाँ से लिखी अपनी कहानी मैं ने

خون ارماں سے لکھی اپنی کہانی میں نے

शायर: Qaisar Siddiqi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़ून-ए-अरमाँ से लिखी अपनी कहानी मैं ने
ज़िंदगानी से कभी हार न मानी मैं ने

ख़्वाब कहते हैं किसे ये कोई मुझ से पूछे
ख़्वाब-ज़ारों में गुज़ारी है जवानी मैं ने

जिस ने तूफ़ान उठा रक्खा था मेरे घर में
अपने कमरे से हटा दी वो निशानी मैं ने

प्यास की धूप में जलता रहा ता-'उम्र मगर
अपने दरिया से भी माँगा नहीं पानी मैं ने

जो भी कहना है वो नर्मी से कहूँगा 'क़ैसर'
क्यों कि सीखी ही नहीं शो'ला-बयानी मैं ने