उर्दू शायरी · ग़ज़ल

khil uThe hain zaKHm phulon ki tarah

खिल उठे हैं ज़ख़्म फूलों की तरह

کھل اٹھے ہیں زخم پھولوں کی طرح

शायर: Sabaa Chhabbi S S6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

खिल उठे हैं ज़ख़्म फूलों की तरह
कोई आया है बहारों की तरह

हसरतों की बद-नसीबी देखिए
बुझ गईं सारी चराग़ों की तरह

ख़्वाब की भी सिसकियाँ सुन लीजिए
टूट के बिखरे हैं शीशों की तरह

सरसरी सी इक नज़र उन की पड़ी
आज हम भी हैं हज़ारों की तरह

लुत्फ़ जाने का जहाँ से बढ़ के हो
याद गर आऊँ मिसालों की तरह

अब 'सबा' कब तक करेगी इंतिज़ार
उस का आना है हवाओं की तरह