उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHabar nahin ki koi kis ke intiKHab mein hai

ख़बर नहीं कि कोई किस के इंतिख़ाब में है

خبر نہیں کہ کوئی کس کے انتخاب میں ہے

शायर: Ehsan Akbar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़बर नहीं कि कोई किस के इंतिख़ाब में है
मगर जो शख़्स कल उभरेगा मेरे ख़्वाब में है

जहान वालों के लाखों इधर उधर के जवाब
हयात का तो सवाल आदमी के बाब में है

हमें न घेरती शायद ये चार-दीवारी
मगर ये ख़ाक जो इस आलम-ए-ख़राब में है

ख़ुद अपने पर जो गए हैं वो तिफ़्ल कौन से हैं
वो नस्ल कैसी है जिस का जहाँ अज़ाब में है

नए जहान के मे'मार पहले गुज़़रेंगे
फिर उस के बाद वो दुनिया जो सिर्फ़ ख़्वाब में है

अजब से नक़्श मैं दीवार-ओ-दर पे देखता हूँ
बस आने वाले हैं जिन का सुख़न किताब में है