उर्दू शायरी · ग़ज़ल

Khaali-uz-zehn hue jab se KHalaon ki tarah

ख़ाली-उज़-ज़ेहन हुए जब से ख़लाओं की तरह

خالی الذہن ہوئے جب سے خلاؤں کی طرح

शायर: Aajiz Hinganghat6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़ाली-उज़-ज़ेहन हुए जब से ख़लाओं की तरह
हम भटकते रहे बे-लाग हवाओं की तरह

ख़ुदकुशी जुर्म है संगीन ख़ताओं की तरह
ज़िंदगी देख इधर हम में ख़ुदाओं की तरह

कितना आसान है एहसास की तल्ख़ी का 'इलाज
ज़हर बिकता है सर-ए-आम दवाओं की तरह

क्या मुक़द्दर है कि सूरज के नगर में रह कर
चाँद से लोग हैं तारीक गुफाओं की तरह

हाए इस दौर की तक़दीर में आवाज़-ए-अज़ाँ
कारगर क्यों नहीं मेलों की सदाओं की तरह

उस के जलते हुए होंटों पे मिरा नाम 'आजिज़'
आज भी आता है मजबूर दु'आओं की तरह