उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek ek pata hawaon se hai laDne wala

एक इक पता हवाओं से है लड़ने वाला

ایک اک پتا ہواؤں سے ہے لڑنے والا

शायर: Aajiz Hinganghat5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

एक इक पता हवाओं से है लड़ने वाला
पेड़ उस का नहीं आँधी से उखड़ने वाला

राह चलते हुए उँगली भी किसी की न पकड़
भीड़ में होता है हर शख़्स बिछड़ने वाला

इक हुमकते हुए बच्चे की तरह ज़िद न कर
ख़ुशनुमा जिस्म खिलौना है बिगड़ने वाला

ख़त्म महलों की रवा-दारी का दस्तूर हुआ
अब यहाँ कौन है दीवार में गढ़ने वाला

ज़िंदगी शहर बसाने में है मसरूफ़ 'आजिज़'
गाँव तूफ़ान की ज़द में है उजड़ने वाला