उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jo riwayat ka munkir ho aae

जो रिवायत का मुंकिर हो आए

جو روایت کا منکر ہو آئے

शायर: Nadeem Siddiqui5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जो रिवायत का मुंकिर हो आए
नक़्श-हा-ए-बुज़ुर्गाँ मिटाए

उन के दिल में जगह मिल गई है
मेरी क़ीमत ज़माना लगाए

मैं समुंदर पे हँसता रहूँगा
या मिरी तिश्नगी ये बुझाए

ग़म की हुर्मत इसी में छुपी है
एक आँसू भी गिरने न पाए

ज़िंदगी मेरे क़दमों तले है
मौत मुझ पे अब आँसू बहाए