उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jo hai chashma use sarab karo

जो है चश्मा उसे सराब करो

جو ہے چشمہ اسے سراب کرو

शायर: Bakul Dev7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जो है चश्मा उसे सराब करो
शहर-ए-तिश्ना में इंक़लाब करो

मुस्कुराने का फ़न तो बअ'द का है
पहले साअ'त का इंतिख़ाब करो

अब के ताबीर मसअला न रहे
ये जो दुनिया है इस को ख़्वाब करो

और पकने दो इश्क़ की मिट्टी
पार उजलत में मत चनाब करो

अहद-ए-नौ के अजब तक़ाज़े हैं
जो है ख़ुशबू उसे गुलाब करो

यूँ ख़ुशी की हवस न जाएगी
एक इक ग़म को बे-नक़ाब करो

पहले पूछो सवाल अपने तईं
फिर ख़ला से तलब जवाब करो