उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jiwan hai pal pal ki uljhan kis kis pal ki baat karen

जीवन है पल पल की उलझन किस किस पल की बात करें

جیون ہے پل پل کی الجھن کس کس پل کی بات کریں

शायर: Vilas Pandit Musafir5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जीवन है पल पल की उलझन किस किस पल की बात करें
इन लम्हों को भूल के हम तुम गीत ग़ज़ल की बात करें

रोज़ ही पीना रोज़ पिलाना रोज़ ग़मों से टकराना
इक दिन मय को भूल के आओ गंगा-जल की बात करें

सौ बरसों के इस जीने से हासिल क्या हो पाएगा
जिस ने दिल को ख़ुशियाँ दी हों उस इक पल की बात करें

क्या पाया है भीड़ में खो कर क्या पाया तन्हाई में
आओ यारो इन रस्मों के फेर-बदल की बात करें

आज वफ़ा की राह 'मुसाफ़िर' धुँदली धुँदली लगती है
कोहरा जिस ने बरसाया है उस बादल की बात करें