उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek bhi qatra na chhoDa kijiye

एक भी क़तरा न छोड़ा कीजिए

ایک بھی قطرہ نہ چھوڑا کیجیے

शायर: Vilas Pandit Musafir7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

एक भी क़तरा न छोड़ा कीजिए
दिल मिरा जब भी निचोड़ा कीजिए

आप ही के नाम से पहचान हो
नाम मेरा साथ जोड़ा कीजिए

सीधे सीधे चल के क्या हासिल हुआ
ज़िंदगी मुड़ती है मोड़ा कीजिए

सिर्फ़ दुनिया पर ही सारी तोहमतें
ख़ुद को भी आख़िर झिंझोड़ा कीजिए

लेने वाले तो सभी कुछ ले गए
आप भी एहसान थोड़ा कीजिए

आप को ये हक़ मोहब्बत में दिया
दिल है मेरा ख़ूब तोड़ा कीजिए

मैं 'मुसाफ़िर' हूँ मुझे चलना ही है
बा-अदब छाले न फोड़ा कीजिए