उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jalan ke KHauf se bahar nikal sako to chalo

जलन के ख़ौफ़ से बाहर निकल सको तो चलो

جلن کے خوف سے باہر نکل سکو تو چلو

शायर: Nabeel Ahmad Nabeel8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जलन के ख़ौफ़ से बाहर निकल सको तो चलो
बिछी है धूप ही रस्तों में चल सको तो चलो

यही तक़ाज़ा है इस बार भी मोहब्बत का
बदन पे गर्द-ए-सफ़र को जो मल सको तो चलो

जला के ज़िल्लत-ए-शब में हथेलियों पे चराग़
हवा के रुख़ को अगरचे बदल सको तो चलो

मिला है इज़्न-ए-मसाफ़त कड़े अंधेरों में
किसी चराग़ की लौ में जो ढल सको तो चलो

ख़याल रखना अजल आख़िरी पड़ाव नहीं
अज़ाब-ए-उम्र से बाहर निकल सको तो चलो

बहुत ही टेढ़ा है ऐ दोस्त इश्क़ का रस्ता
बग़ैर राह-नुमा के सँभल सको तो चलो

इस एक शर्त पे गुलशन में दाख़िला होगा
किसी गुलाब के साँचे में ढल सको तो चलो

हर एक गाम पे बिखरी है राख सदियों की
'नबील' बन के शरारा जो जल सको तो चलो