उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jab bhi mujhko apna bachpan yaad aata hai

जब भी मुझ को अपना बचपन याद आता है

جب بھی مجھ کو اپنا بچپن یاد آتا ہے

शायर: Qaisar Siddiqi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जब भी मुझ को अपना बचपन याद आता है
बचपन के इक प्यार का बचपन याद आता है

देख के इस मुँह-ज़ोर जवानी की मुँह-ज़ोरी
मुझ को इस का तोतला बचपन याद आता है

औरत माँ थी बहन थी दादी थी नानी थी
कोरे काग़ज़ जैसा बचपन याद आता है

तूफ़ानी बारिश घर में सैलाब का आलम
ठंडा चूल्हा भूका बचपन याद आता है

तन्हाई का दुख तो कम हो किसी बहाने
देखें किस का किस का बचपन याद आता है

शहद के जैसी मीठी बोली याद आती है
दूध के जैसा उजला बचपन याद आता है

बचपन के यारों से मिलता रहता हूँ मैं
'क़ैसर' मुझ को सब का बचपन याद आता है