उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jaan is dil ki bachane ke liye

जान इस दिल की बचाने के लिए

جان اس دل کی بچانے کے لیے

शायर: Saaieb S. M. Patil5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जान इस दिल की बचाने के लिए
याद आ बस याद आने के लिए

बोझ दिन का पुतलियों में रह गया
तंज़ रातों के उठाने के लिए

देखता है जिस नज़र से ये मुझे
मैं वही हूँ इस ज़माने के लिए

सब यही रह जाएगा वक़्त-ए-अजल
कुछ नहीं खोना है पाने के लिए

फ़ल्सफ़ा हो ज़िंदगी का बस यही
ग़म कमाओ तो उड़ाने के लिए