उर्दू शायरी · ग़ज़ल

baat sahil ki rakhe TuTa shikara dekh le

बात साहिल की रखे टूटा शिकारा देख ले

بات ساحل کی رکھے ٹوٹا شکارا دیکھ لے

शायर: Saaieb S. M. Patil5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बात साहिल की रखे टूटा शिकारा देख ले
पास तो मझधार है क्यूँ कर किनारा देख ले

रेत के टीले जहाँ हम ने बनाए अब वहाँ
खेलती बेबाक लहरों का नज़ारा देख ले

एक तितली जिस्म हल्का बोझ रंगों पर गया
खींच कर हर आँख ने दिल में उतारा देख ले

दिल है जो बारूद का घर सूख कर तय्यार है
आब से कह दो न अब कोई शरारा देख ले

पीछे पीछे हम तिरे आते रहे हैं ज़िंदगी
इक दफ़ा मुड़ कर कभी किस ने पुकारा देख ले