उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ishq hi ishq ho aashiq ho na mashuq jahan

इश्क़ ही इश्क़ हो आशिक़ हो न माशूक़ जहाँ

عشق ہی عشق ہو عاشق ہو نہ معشوق جہاں (ردیف .. ے)

शायर: Dattatriya Kaifi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इश्क़ ही इश्क़ हो आशिक़ हो न माशूक़ जहाँ
ऐसी इक दरगह-ए-तौहीद-मआ'ब और भी है

होश से काट ये दिन ज़िंदा-दिली से रख काम
शेब के बा'द मिरी जान-ए-शबाब और भी है

यार मय-ख़ाने अगर कर गए ख़ाली ग़म क्या
अब भी अब्र आता है और ख़ुम में शराब और भी है

घर किया 'ग़ालिब'-ओ-'मोमिन' ने जहाँ आँखों में
इसी बस्ती में कोई ख़ाना-ख़राब और भी है