उर्दू शायरी · ग़ज़ल

is tera sarzamin se misal-e-qamar chalo

इस तीरा सरज़मीं से मिसाल-ए-क़मर चलो

اس تیرہ سرزمیں سے مثال قمر چلو

शायर: Qaisar Qalandar8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इस तीरा सरज़मीं से मिसाल-ए-क़मर चलो
देखो फ़राज़-ए-नूर-ओ-नशेब-ए-सफ़र चलो

बाँहें उठाए याद कोई दिल-नवाज़ याद
तुम को पुकारती है सर-ए-रहगुज़र चलो

देखो वो करबला-ए-तमन्ना है उस तरफ़
सहरा लहू लहू है चलो बे-ख़तर चलो

आँखों में आरज़ू के जलाते रहो चराग़
तारीकियों से नूर उगाओ मगर चलो

कोहराम ख़्वाहिशों का बपा है क़दम क़दम
अपनी मता-ए-दर्द लिए सोच कर चलो

हर मंज़र-ए-हयात यहाँ है शफ़क़ शफ़क़
रंग-ए-हिना से तुम न बचा कर नज़र चलो

शाइस्ता-ए-बहार है हर मंज़र-ए-ख़िज़ाँ
नग़्मों का शामियाना सजे नग़्मा-गर चलो

मैं शौक़-ए-ना-तमाम हूँ इक हुस्न-ए-ना-तमाम
मेरे लिए करो न कभी आँख तर चलो