उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek hunar hai jo kar gaya hun main

इक हुनर है जो कर गया हूँ मैं

اک ہنر ہے جو کر گیا ہوں میں

शायर: Jaun Eliya9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इक हुनर है जो कर गया हूँ मैं
सब के दिल से उतर गया हूँ मैं

कैसे अपनी हँसी को ज़ब्त करूँ
सुन रहा हूँ कि घर गया हूँ मैं

क्या बताऊँ कि मर नहीं पाता
जीते-जी जब से मर गया हूँ मैं

अब है बस अपना सामना दर-पेश
हर किसी से गुज़र गया हूँ मैं

वही नाज़-ओ-अदा वही ग़म्ज़े
सर-ब-सर आप पर गया हूँ मैं

अजब इल्ज़ाम हूँ ज़माने का
कि यहाँ सब के सर गया हूँ मैं

कभी ख़ुद तक पहुँच नहीं पाया
जब कि वाँ उम्र भर गया हूँ मैं

तुम से जानाँ मिला हूँ जिस दिन से
बे-तरह ख़ुद से डर गया हूँ मैं

कू-ए-जानाँ में सोग बरपा है
कि अचानक सुधर गया हूँ मैं