उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ho gae na-mehrban wo mehrban hone ke baad

हो गए ना-मेहरबाँ वो मेहरबाँ होने के बा'द

ہو گئے نامہرباں وہ مہرباں ہونے کے بعد

शायर: Mahboob-ul-Haq Arman3 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हो गए ना-मेहरबाँ वो मेहरबाँ होने के बा'द
'उम्र भर का ग़म है दम भर शादमाँ होने के बा'द

बाँटती फिरती है टुकड़े अहल-ए-वहशत में सबा
है तबर्रुक मेरा दामन धज्जियाँ होने के बा'द

रंग-ओ-बू तक लाला-ओ-गुल नाम था जिस चीज़ का
है ख़स-ओ-ख़ाशाक पामाल-ए-ख़िज़ाँ होने के बा'द