उर्दू शायरी · ग़ज़ल

anjam apna husn-parasti mein ye hua

अंजाम अपना हुस्न-परस्ती में ये हुआ

انجام اپنا حسن پرستی میں یہ ہوا (ردیف .. ن)

शायर: Mahboob-ul-Haq Arman3 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अंजाम अपना हुस्न-परस्ती में ये हुआ
झाँके कुएँ मुदाम हसीनों की चाह में

मुझ ख़ानुमा-ख़राब को रुस्वा भी कर दिया
थी इक यही कमी मिरे हाल-ए-तबाह में

'अरमान' है ये शहर-ए-ख़मोशाँ का इंतिज़ाम
कुछ भी नहीं है फ़र्क़ गदा और शाह में