उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hayat raqs mein hai kaenat raqs mein hai

हयात रक़्स में है काएनात रक़्स में है

حیات رقص میں ہے کائنات رقص میں ہے

शायर: Qaisar Siddiqi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हयात रक़्स में है काएनात रक़्स में है
चराग़-ए-बादा जलाओ कि रात रक़्स में है

सितारे आए हैं ज़र्रों की बंदगी के लिए
नवेद-ए-सुब्ह मुबारक हयात रक़्स में है

कुछ इस अदा से चला क़ाफ़िला गुनाहों का
नुमूद-ए-सुब्ह से अब तक नजात रक़्स में है

है एक हश्र सा बरपा ज़मीं के सीने में
कुछ इस तरह नफ़स-ए-हादसात रक़्स में है

ये कौन मौत के चेहरे पे मल गया कालक
फ़ना की आँखें हैं नम और सबात रक़्स में है

क़रीब ही कहीं प्यासों का क़ाफ़िला तो नहीं
मचल रहे हैं किनारे फ़ुरात रक़्स में है

ख़ुदा पे जब से बुरा वक़्त आ गया 'क़ैसर'
हुबल के लब पे है नग़्मा मनात रक़्स में है