उर्दू शायरी · ग़ज़ल

har ek jalwa hasin tera har ek ada be-misal jaanan

हर एक जल्वा हसीन तेरा हर इक अदा बे-मिसाल जानाँ

ہر ایک جلوہ حسین تیرا ہر اک ادا بے مثال جاناں

शायर: Hafiz Hamza Salmani4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हर एक जल्वा हसीन तेरा हर इक अदा बे-मिसाल जानाँ
मिरी मोहब्बत सदा रहेगी कभी न होगा ज़वाल जानाँ

तिरे ख़यालों में गुम हुए हैं तिरी ही यादों में खो गए हैं
हमें तो बिस्मिल बना गई है तुम्हारी चश्म-ए-ग़ज़ाल जानाँ

तिरी नवाज़िश का मैं हूँ तालिब कि मुझ पे भी हो तिरी 'इनायत
तिरे ही दर का मैं हूँ भिकारी मिरा तू रखना ख़याल जानाँ

मिरी उमीदों के सब दिए तो उसी से 'हमज़ा' हुए हैं रौशन
उसी से है इल्तिजा ये मेरी मुझे तू फिर से उजाल जानाँ