उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hamein to sahil-e-dariya ki pyas hona tha

हमें तो साहिल-ए-दरिया की प्यास होना था

ہمیں تو ساحل دریا کی پیاس ہونا تھا

शायर: Faiz5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हमें तो साहिल-ए-दरिया की प्यास होना था
सुकूत-ए-हिज्र का इक ग़म-शनास होना था

खुला है इस तरह अब के नई रुतों का भरम
ज़मीं को इतना कहाँ बे-लिबास होना था

उन्हें भी वक़्त ने पत्थर बना दिया जिन को
हमारे अहद का आदम-शनास होना था

पहन के मुझ को एक रोज़ तमन्ना का लिबास
लहू लहू कोई तस्वीर-ए-यास होना था

भटक रहे हो कहाँ दोस्त अपने मरकज़ से
तुम्हें तो 'फ़ैज़' के दिल के ही पास होना था