उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chahaton ko nit-nae andaz se dekha karo

चाहतों को नित-नए अंदाज़ से देखा करो

چاہتوں کو نت نئے انداز سے دیکھا کرو

शायर: Faiz5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चाहतों को नित-नए अंदाज़ से देखा करो
वस्ल की राहत में फ़ुर्क़त का समाँ लिक्खा करो

क्या पता उन की भी लग जाए कोई क़ीमत कहीं
संग-रेज़ो को भी हीरों की तरह परखा करो

ज़ात के सहरा में कर पाओगे क्या अपनी तलाश
उम्र भर पीछे सराब-ए-ज़ीस्त के भागा करो

इक हवा-ए-तुंद का झोंका उड़ा ले जाएगा
रेत के सीने पे कोई नाम मत लिक्खा करो

तुम बहुत घबरा गए घर की वीरानी से 'फ़ैज़'
अब हुजूम-ए-शहर में तन्हाइयाँ ढूँडा करो