उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum duniya se jab tang aaya karte hain

हम दुनिया से जब तंग आया करते हैं

ہم دنیا سے جب تنگ آیا کرتے ہیں

शायर: Taimur Hasan7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम दुनिया से जब तंग आया करते हैं
अपने साथ इक शाम मनाया करते हैं

सूरज के उस जानिब बसने वाले लोग
अक्सर हम को पास बुलाया करते हैं

यूँही ख़ुद से रूठा करते हैं पहले
देर तलक फिर ख़ुद को मनाया करते हैं

चुप रहते हैं उस के सामने जा कर हम
यूँ उस को चख याद दिलाया करते हैं

नींदों के वीरान जज़ीरे पर हर शब
ख़्वाबों का इक शहर बसाया करते हैं

इन ख़्वाबों की क़ीमत हम से पूछ कि हम
इन के सहारे उम्र बिताया करते हैं

अब तो कोई भी दूर नहीं तो फिर 'तैमूर'
हम ख़त किस के नाम लिखाया करते हैं