उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek manzil hai ek jada hai

एक मंज़िल है एक जादा है

ایک منزل ہے ایک جادہ ہے

शायर: Taimur Hasan6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

एक मंज़िल है एक जादा है
ज़िंदगी मेरी कितनी सादा है

तू मुझे अपना एक पल देगा
ये करम मुझ पे कुछ ज़ियादा है

जो रुके हैं सवार हैं सारे
चलने वाला तो पा-प्यादा है

सिद्क़-ए-दिल से पुकारना मुझ को
लौट आऊँगा मेरा वा'दा है

फिर जो करने लगा है तू वा'दा
क्या मुकरने का फिर इरादा है

ज़र्फ़-ए-दुनिया जो तंग है 'तैमूर'
तेरा दिल भी कहाँ कुशादा है