उर्दू शायरी · ग़ज़ल

han mujhe gawara hai ishq ka safar tanha

हाँ मुझे गवारा है इश्क़ का सफ़र तन्हा

ہاں مجھے گوارا ہے عشق کا سفر تنہا

शायर: Ehsas Muradabadi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हाँ मुझे गवारा है इश्क़ का सफ़र तन्हा
उस ने मुझ को छोड़ा है कुछ तो सोच कर तन्हा

ज़ीस्त है मगर सूनी इश्क़ है मगर तन्हा
चश्म सर-बसर वीराँ क़ल्ब सर-बसर तन्हा

वो जमाल की ताबिश जैसे नूर की बारिश
हुस्न-ए-यार की यूरिश और मिरी नज़र तन्हा

दिल की एक इक हसरत छोड़ कर हुई रुख़्सत
हाए-रे ये सन्नाटा हाए-रे ये घर तन्हा

क्या क़यामतें यारो हुस्न के जिलौ में थीं
हम ने दूर तक देखा इश्क़ था मगर तन्हा

ठोकरें ही खाऊँगा गिर के उठ न पाऊँगा
मंज़िल-ए-मोहब्बत में मैं चला अगर तन्हा

दामन-ए-मोहब्बत पर दिल का ख़ून भी होगा
तेरा ग़म मनाएगी कैसे चश्म-ए-तर तन्हा