उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ghamon se bashar ko riha dekhna

ग़मों से बशर को रिहा देखना

غموں سے بشر کو رہا دیکھنا

शायर: Vikas Joshi Wahid7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ग़मों से बशर को रिहा देखना
सुलगती कोई जब चिता देखना

गुज़रना अक़ीदत से कुछ इस तरह
कि पत्थर में अपना ख़ुदा देखना

ये करना दुआ कि लगे न नज़र
शजर जब कोई तुम हरा देखना

न हो मुतमइन सौंप कर कश्तियाँ
डुबो दे न ये नाख़ुदा देखना

बुलंदी पे ख़ुद को भी पाना कभी
समय की बदलती अदा देखना

है मुमकिन नतीजा जुदाई भी हो
मगर इश्क़ की इब्तिदा देखना

न जाने घड़ी कौन हो आख़िरी
हुए फ़र्ज़ सारे अदा देखना