उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek patthar hai magar aaina-KHane kitne

एक पत्थर है मगर आइना-ख़ाने कितने

ایک پتھر ہے مگر آئنہ خانے کتنے

शायर: Lateef Saani4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

एक पत्थर है मगर आइना-ख़ाने कितने
एक दीवाना लगाएगा निशाने कितने

सिर्फ़ इक तुम ही नहीं और न जाने कितने
लोग बन जाते हैं उल्फ़त में दिवाने कितने

इश्क़ में लोग बनाते हैं बहाने कितने
एक दिल है मगर हैं इस के फ़साने कितने

मैं ने इक बार तिरा जल्वा हसीं देखा है
इस मुलाक़ात को गुज़रे हैं ज़माने कितने