उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek duniya bana gai miTTi

एक दुनिया बना गई मिट्टी

ایک دنیا بنا گئی مٹی

शायर: Laiq Aajiz7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

एक दुनिया बना गई मिट्टी
जिस घड़ी रूह पा गई मिट्टी

जिस ने सोचा कि रौंद दें उस को
आख़िर इक दिन चबा गई मिट्टी

मैं ने जितने भी बीज बोए थे
बाँझ औरत थी खा गई मिट्टी

तिश्नगी थी कुएँ की क़ीमत में
बदली छाई गिरा गई मिट्टी

सुर्ख़-रू है वो सारी दुनिया में
साथ जिस का निभा गई मिट्टी

सब क़बाले उठा के ले आई
किसी की है ये बता गई मिट्टी

किस ने कब किस को कैसे क़त्ल किया
शक्ल सब की छुपा गई मिट्टी